क्या इंडेक्स फंड एक्टिव म्यूचुअल फंड से बेहतर होता है?
ज़्यादातर मामलों में, लंबी अवधि में हां — लेकिन हर कैटेगरी में बराबर नहीं। large-cap में इंडेक्स फंड्स की बढ़त बहुत मज़बूत है, जबकि mid-cap और small-cap में active फंड्स कुछ सालों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। नीचे SPIVA India के असली डेटा के साथ पूरी तस्वीर समझते हैं।
SPIVA क्या है और यह क्यों भरोसेमंद डेटा सोर्स है
SPIVA (S&P Indices Versus Active) S&P Dow Jones Indices द्वारा प्रकाशित एक स्कोरकार्ड है, जो एक्टिव मैनेज्ड फंड्स की तुलना उनके संबंधित बेंचमार्क से करता है [S&P Dow Jones Indices ( https://www.spglobal.com/spdji/en/research-insights/spiva/about-spiva/ ) । यह डेटा खास तौर पर भरोसेमंद इसलिए है क्योंकि यह survivorship bias को नज़रअंदाज़ नहीं करता — बंद हो गए या मर्ज हुए फंड्स को भी शामिल करता है, जिससे पूरी मार्केट की ज़्यादा honest तस्वीर मिलती है [Evidence Investor]( https://www.evidenceinvestor.com/spiva ) ।
भारत में 2025 का असली डेटा क्या कहता है
2025 में भारतीय एक्टिव मैनेजर्स का प्रदर्शन मिला-जुला रहा — ज़्यादातर active large-cap और ELSS फंड्स broad market के मुकाबले पीछे रहे, जबकि active mid/small-cap फंड्स ने majority outperformance दिखाया, जो 2014 के बाद उनका सबसे बेहतर relative प्रदर्शन था [S&P Dow Jones Indices]( https://www.spglobal.com/spdji/en/spiva/article/spiva-india/ ) ।
संख्याओं में देखें तो:
- 2025 में S&P India LargeMidCap इंडेक्स ने लगभग 8.9% रिटर्न दिया, जबकि equal-weighted active large-cap कैटेगरी ने लगभग 7.3% (asset-weighted लगभग 9.4%) दिया [MF Returns]( https://mfreturns.com/blog/active-funds-beat-benchmarks-india/ )
- S&P India SmallCap इंडेक्स लगभग 7.9% गिरा, जबकि active mid/small-cap फंड्स equal-weighted आधार पर सिर्फ 0.3% और asset-weighted आधार पर 0.7% गिरे [MF Returns] ( https://mfreturns.com/blog/active-funds-beat-benchmarks-india/ )
लॉन्ग-टर्म पिक्चर ज़्यादा साफ़ है
10 साल के होराइज़न पर, large-cap में लगभग तीन-चौथाई active फंड्स अपने बेंचमार्क से पीछे रहे [MF Returns]( https://mfreturns.com/blog/active-funds-beat-benchmarks-india/ ) । मिड और स्मॉल-कैप कैटेगरी में भी 10-साल underperformance रेट लगभग 79% रहा — यानी एक अच्छे relative साल के बावजूद लॉन्ग-टर्म स्केप्टिसिज्म कायम है [MF Returns]( https://mfreturns.com/blog/active-funds-beat-benchmarks-india/ ) ।
एक ज़रूरी टेक्निकल बात — SPIVA mid-cap और small-cap फंड्स को एक ही equity bucket में मिला देता है, इसलिए इस आंकड़े को pure mid-cap odds नहीं माना जा सकता [MF Returns]( https://mfreturns.com/blog/active-funds-beat-benchmarks-india/ ) ।
ग्लोबल पैटर्न भी यही दिखाता है
यह सिर्फ भारत की बात नहीं — 15 साल के पीरियड में, 22 में से एक भी US equity कैटेगरी में majority active managers अपने बेंचमार्क से आगे नहीं निकल पाए [Institute of Business & Finance]( https://icfs.com/specialists-desk/spiva-scorecard-results ) । SPIVA का यह पैटर्न दुनिया भर में दशकों से consistent रहा है — एक्टिव मैनेजमेंट लगातार बेंचमार्क से कम रिटर्न देता आया है [Index Fund Advisors]( https://www.ifa.com/articles/spiva-report-active-vs-passive ) ।
तो क्या एक्टिव फंड्स कभी जीतते नहीं?
ऐसा नहीं है। कुछ कैटेगरी में, जैसे फिक्स्ड इनकम में, majority outperformance भी देखा गया है [S&P Dow Jones Indices]( https://www.spglobal.com/spdji/en/spiva/article/spiva-india/ ) — लेकिन समस्या यह है कि consistency बहुत कम है।
SPIVA Persistence Scorecards बताते हैं कि एक साल में टॉप-क्वार्टाइल में रहने वाले फंड्स अगले सालों में वहीं बने रहना मुश्किल पाते हैं — 2020 के टॉप-क्वार्टाइल large-cap फंड्स में से कोई भी अगले दो सालों तक टॉप-क्वार्टाइल में नहीं टिक सका [Betashares]( https://www.betashares.com.au/insights/spiva-report-active-vs-passive/ ) । मतलब — एक साल का outperformance ज़्यादातर luck होता है, skill नहीं।
इंडेक्स फंड चुनने का तर्क कब सबसे मज़बूत है
1. Large-cap कैटेगरी में — यहां index का बढ़त सबसे ज़्यादा consistent है, क्योंकि बड़ी, well-researched कंपनियों में mispricing ढूंढना मुश्किल होता जाता है
2. लंबी investment horizon में — जितना लंबा समय, underperformance का pattern उतना ही स्पष्ट होता है
3. फीस-सेंसिटिव निवेशकों के लिए — एक्टिव फंड की ज़्यादा expense ratio को सालों-साल "कमाना" पड़ता है, जो आंकड़ों में मुश्किल साबित होता रहा है
जहां एक्टिव फंड्स के लिए गुंजाइश बचती है
एक संतुलित नज़रिया यह हो सकता है कि index funds को पोर्टफोलियो का core (मुख्य आधार) बनाया जाए, और active funds को सिर्फ एक छोटे satellite हिस्से के रूप में रखा जाए — बशर्ते fees, overlap और benchmark drift पर नज़र रखी जाए [MF Returns]( https://mfreturns.com/blog/active-funds-beat-benchmarks-india/ ) ।
निष्कर्ष
डेटा साफ़ कहता है — ज़्यादातर investors के लिए, ज़्यादातर समय में, इंडेक्स फंड एक सरल, कम-खर्चीला और predictable विकल्प साबित होता है। mid/small-cap में active फंड्स कभी-कभी बेहतर दिख सकते हैं, लेकिन उस outperformance को बनाए रखना दुर्लभ है। यह फैसला "कौन हमेशा जीतता है" का नहीं, बल्कि "किस पर भरोसा consistent रूप से किया जा सकता है" का है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
क्या इंडेक्स फंड हर कैटेगरी में एक्टिव फंड से बेहतर होते हैं?
नहीं। large-cap में इंडेक्स फंड्स की बढ़त सबसे मज़बूत और consistent है, लेकिन mid-cap और small-cap में कुछ सालों में active फंड्स बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं — हालांकि यह outperformance लंबे समय तक बना रहना मुश्किल साबित होता है।
SPIVA रिपोर्ट क्यों भरोसेमंद मानी जाती है?
क्योंकि यह survivorship bias को नज़रअंदाज़ नहीं करती — बंद हो चुके या merge हो चुके फंड्स को भी डेटा में शामिल रखती है, जिससे ज़्यादा honest तुलना मिलती है।
अगर एक साल कोई एक्टिव फंड इंडेक्स से बेहतर रिटर्न दे, तो क्या वह skill है?
ज़रूरी नहीं। SPIVA Persistence डेटा दिखाता है कि एक साल का outperformance अक्सर luck होता है, क्योंकि बहुत कम फंड्स लगातार कई सालों तक टॉप-क्वार्टाइल में बने रह पाते हैं।
क्या पोर्टफोलियो में एक्टिव फंड रखने का कोई मतलब है?
हां, अगर core-satellite approach से इस्तेमाल किया जाए — यानी पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा इंडेक्स फंड्स में, और एक छोटा हिस्सा high-conviction active फंड्स में, fees और overlap पर नज़र रखते हुए।
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डिस्क्लेमर: यह लेख SPIVA India और अन्य सार्वजनिक रिपोर्ट्स के डेटा पर आधारित है, और केवल शिक्षा व सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। यह निवेश सलाह नहीं है। आंकड़े समय के साथ बदलते रहते हैं — निवेश से पहले नवीनतम रिपोर्ट्स खुद वेरिफाई करें और SEBI-रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइज़र से सलाह लें।
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